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जयपुर- राजस्थान में 19 नए जिले बनाने की घोषणा हुई हैं। इसके साथ ही तीन नए संभाग भी बनाए जाएंगे। इन नए संभागों में सीकर, पाली और बांसवाड़ा शामिल हैं। यह घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट बहस का जवाब देते हुए की। विधानसभा में शुक्रवार दिनांक 17-3-23 को बजट बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने 19 नए जिले और 3 नए संभागों की घोषणा की। इन नए जिलों और जरूरतों की आपूर्ति के लिए 2,000 करोड़ के बजट का भी प्रावधान घोषित किया गया हैं। गौरतलब हैं कि राजस्थान में पहले 33 जिले थे। बीते दिन मुख्यमंत्री ने 19 नए जिलों की घोषणा की, लेकिन इसके बाद भी राज्य में कुल जिलों की संख्या 50 ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि जयपुर को जयपुर उत्तर और जयपुर दक्षिण में बांटा गया है, जबकि जोधपुर को जोधपुर पूर्व और जोधपुर पश्चिम में बांटा गया हैं। घोषणा में तीन नए संभागीय मुख्यालय बनाए गए हैं। सीकर, पाली और बांसवाड़ा।अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन मुख्यालयों के अंतर्गत कौन से जिले काम करेंगे। इसमें भी क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया हैं। शेखावाटी से सीकर, मारवाड़ से पाली और मेवाड़ के आदिवासी क्षेत्र से बांसवाड़ा को तराशा गया हैं।      चुनाव से कुछ महीनों पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नए जिलों के गठन की घोषणा कर एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की हैं। एक तो यह स्पष्ट हो जाता है कि गहलोत एंटी- इनकंबेंसी का मुकाबला कर रहे हैं और दूसरा वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि राजस्थान में उनके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं हैं।सीएम गहलोत ने विधानसभा में जिन 19 नए जिलों को बनाने की घोषणा की हैं, उनमें अनूपगढ़, बालोतरा, ब्यावर, डीग, दूदू, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, जोधपुर पूर्व, जोधपुर पश्चिम, गंगापुर सिटी, केकड़ी, कोटपुतली, बहरोड़, खैरतल, नीमकाथाना , सांचोर, फलोदी, सलुंबर, शाहपुरा शामिल हैं। इन जिलों के बनने से राज्य की 113 विधानसभा सीटें प्रभावित हो रही हैं। बताते चलें कि सीएम अशोक गहलोत ने सिर्फ जोधपुर में ही तीन जिले बनाए हैं।उधर, जयपुर में भाजपा के गढ़ क्षेत्रों में पैठ बनाने की राजनीतिक चाल चल रही हैं।पाली, जालोर और सिरोही बीजेपी के गढ़ हैं। गहलोत ने सांचौर को जिला और पाली को संभाग बनाकर इन इलाकों में पैठ बनाने की कोशिश की हैं। श्रीगंगानगर संभाग के अनूपगढ़ में भी भाजपा की सीट तोड़ने की कोशिश की जा रही हैं।——————————————-जैन न्यूज़ -मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में नयपद्मसागर ‘आचार्य’ की पदवी पर उमड़ा जैन समाज-मुंबई – प्रसिद्ध जैन संत पूज्य गणिवर्य नयपद्मसागर महाराज का आचार्य पद प्रदान महोत्सव का भव्य समारोह शनिवार 11 मार्च को मुंबई के रेसकोर्स में हर्षोल्लास के साथ आयोजित हुआ।मुंबई के रेसकोर्स में हुए इस विशालतम आयोजन में जैन समाज के सभी संप्रदायों दिगंबर, श्वेतांबर, मूर्तिपूजक एवं तेरापंथ जैन गणिवर्य व सैकड़ों साधुजी साध्वी जी की पावन निश्रा में नयपद्मसागर महाराज अब आचार्य की पदवी धारण कर चुके हैं। इस अवसर पर मुंबई के इस कार्यक्रम में जैन समाज के चारों संप्रदायों के साधु-साध्वियों के अलावा हिन्दू सहित कई अन्य धर्मों के संतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में विशेष आकर्षण के रूप में आचार्य पद प्रदाता राष्ट्रसंत परम पूज्य पद्मसागर सूरीश्वर म. सा., पूज्य प्रशांत सागर जी महाराज, चारों जैन संप्रदायों के पूज्य आचार्य भगवंत, पवित्र पदस्थ गुरू, वंदनीय साधु, पूज्य साध्वी आदि सहित मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, बाबा रामदेव, महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री राज के. पुरोहित, नगरसेवक आकाश पुरोहित, राजस्थान सेल मुंबई भाजपा के अध्यक्ष नरेंद्र भंडारी, लॉयन सुरेश जैन, श्रीमती मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा, जीओ अपेक्स चेरमैन नवीनचंद्र डी मेहता, जीओ अपेक्स के प्रेसीडेंट डा. घेवरचंद बोहरा, मेटल मार्केट के व्यापारी पवन संघवी, भाजपा नेता प्रकाश चोपड़ा, मुकेश दोषी और आशीष जैन के अलावा बड़ी संख्या में राजनेता, सामाजिक पदाधिकारी एवं हजारों जैन धर्मावलंबियों की उपस्थिति रहे। पुणे सादड़ी से खुबीलालजी राठौड़, सेलो वाले बदामियाजी, विलासजी जैन आए हुए थे।पिछले कई दिनों चल रहे कार्यक्रम की तैयारियों के बाद सजाए गए महालक्ष्मी रेसकोर्स का आध्यात्मिक पांडाल देखते ही बन रहा था। आचार्य पद प्रदाता राष्ट्रसंत परम पूज्य पद्मसागर सूरीश्वर महाराज साहेब के साथ पूज्य गुरुदेव नय़पद्म सागर महाराज एवं अन्य साधु-साध्वी विशाल वरघोड़े के साथ पांडाल में प्रवेश किया तो जिन शासन के जय जयकार से पूरा मंडल गूंजने लगा। जब पूज्य पद्मसागर सूरीश्वर महाराज ने आचार्य पद का दायित्व नयपद्मसागर महाराज को प्रदान किया तो वातावरण पूरी तरह से आध्या​त्मिक हो गया और चारों तरफ से गुरुदेव के जय-जय कारों के साथ पांडाल गूंज उठा। उपस्थित हर व्यक्ति उनकी एक झलक देखने और उनको वंदन करने हेतु लालायित दिख रहा था। इस मौके पर आचार्य नयपद्म सागर महाराज ने कहा कि आध्यात्म ऐसा माध्यम हैं, जिसके बिना समाज का कल्याण संभव नहीं हैं। काफी तपस्या और त्याग की बदौलत कोई संत इस पद तक पहुंचता है, जो कि बहुत दुर्लभ हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि संकट के दौरान जैन समाज दूसरों के सुख-दुख में साथ खड़ा था। इस समुदाय ने देश के लिए सर्वोपरि योगदान दिया हैं। समाज के प्रति जैन समुदाय की जन कल्याणकारी भावना से सभी विदित हैं। मुख्यमंत्री आज मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में राष्ट्र संत नयापद्मसागर सूरीश्वर महाराज के आचार्य पदवी समारोह में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुंबई उपनगर जिले के संरक्षक मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, योग गुरू बाबा रामदेव और बड़ी संख्या में देश-विदेश के संत और जैन समाज के करीब 50,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए। शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में राज्य के बजट की घोषणा की और इसमें सभी लोगों की प्रगति और उत्थान को ध्यान में रखा गया हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार के बजट में गौ-सेवा आयोग का गठन किया गया हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से आचार्य की उपाधि प्राप्त करने पर राष्ट्रसंत नयपद्मसागर और प्रशांतसागर को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। शिंदे ने कहा कि आचार्य का पद पाने के लिए घोर तपस्या करनी पड़ती हैं।समारोह में उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस मुकाम पर पहुंचने के बाद करोड़ों लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरना पड़ता हैं। फडणवीस ने कहा कि नयपद्मसागर संत नहीं एक विचार हैं। उन्होंने जैन समाज को संगठित किया और आगे बढ़ाया हैं। यह लोगों को धर्म के साथ-साथ देशभक्ति भी सिखा रहे हैं। इस अवसर पर फडणवीस ने आशा व्यक्त की कि हमारे समाज के सभी लोगों को नयपद्मसागर जी से अच्छे मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन मिले। महाराष्ट्र के मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, योग गुरू रामदेव की उपस्थिति में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने ‘महान मंगल ग्रंथ’ का विमोचन भी किया।——— ———होली के मौके पर गैर नृत्य करना पड़ा भारी-जैन मंदिर के ट्रस्टी ने 40 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई रिपोर्ट –माउंट आबू-हिल स्टेशन माउंट आबू के देलवाड़ा जैन मंदिर में होली के मौके पर गैर नृत्य किया गया। गैर नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने के बाद जैन मंदिर प्रशासन ने पूरे मामले को लेकर माउंट आबू पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई हैं।देलवाड़ा जैन मंदिर में माताजी का मंदिर हैं, जहां हर साल लोग होली के मौके पर दर्शन करने जाते हैं और ऐसे में होली के मौके पर स्थानीय लोगों ने गैर नृत्य किया। जिससे जैन मंदिर के सदस्यों में आक्रोश हैं। इसको लेकर जैन मंदिर के ट्रस्टी दिनेश जैन ने पुलिस थाना माउंट आबू में 30 से 40 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। वहीं अब पूरे मामले को लेकर माउंट आबू पुलिस जांच में जुट गई हैं। पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैं। माउंट आबू थानाधिकारी किशोर सिंह भाटी ने बताया कि 7 मार्च को धुलंडी के मौके पर देलवाड़ा के स्थानीय लोग और आसपास के दुकानदार मंदिर में माता के दर्शन के लिए गए थे। उनके द्वारा इस बार जैन मंदिर के अंदर भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के आगे मना करने के बाद भी गैर खेली गई। जिससे जैन समाज की धार्मिक भावना ओं को ठेस पहुंची हैं। इस तरह की रिपोर्ट जैन ट्रस्टी दिनेश जैन की ओर से दी गई थी। जिसपर पुलिस ने आईपीसी की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया हैं।——————————————————-चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष 2023- हिंदू पंचांग के मुताबिक हर साल चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती हैं। सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का खास महत्व हैं।नवरात्रि में भक्त घटस्थापना कर नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हैं। नौ दिनों तक भक्त मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहते हैं। ऐसे में आइये जानते हैं इस बार चैत्र नवरात्रि की तिथि, घटस्थापना का मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत का महत्व समेत अन्य जानकारियां।चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 मार्च 2023 की रात 10:52 बजे से शुरू होगी, जो 22 मार्च को रात 8:20 मिनट पर समाप्त होगी।उदया तिथि के अनुसार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 22 मार्च से होगी। चैत्र नवरात्रि की तिथियां और मां के स्वरूपों के नाम-
22 मार्च, बुधवार- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ, घटस्थापना
23 मार्च, गुरुवार- चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन- द्वितीया तिथि, मां ब्रह्मचारिणी पूजा।
24 मार्च, शुक्रवार- चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन- तृतीया तिथि, मां चंद्रघण्टा पूजा।
25 मार्च, शनिवार- चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन-चतुर्थी तिथि, मां कुष्माण्डा पूजा।
26 मार्च, रविवार- चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन-पंचमी तिथि, मां स्कंदमाता पूजा।
27 मार्च, सोमवार- चैत्र नवरात्रि का छठा दिन-षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी पूजा।
28 मार्च, मंगलवार- चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन- सप्तमी तिथि, मां कालरात्री पूजा।
29 मार्च, बुधवार- चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन-अष्टमी तिथि, मां महागौरी पूजा,दुर्गा अष्टमी, महाष्टमी।
30 मार्च, गुरुवार- नवमी तिथि, मां सिद्धीदात्री पूजा, दुर्गा महानवमी ।घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च की सुबह 06:29 बजे से सुबह 07:39 बजे तक रहेगा। यानी भक्तों के पास घटस्थापना के लिए 1 घंटा 10 मिनट का ही समय रहेगा।वहीं घटस्थापना का अमृत काल सुबह 11:07 बजे से 12:35 बजे तक रहेगा।ऐसे करें कलश की स्थापना- घटस्थापना के लिए मिट्टी में सात प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। उसके ऊपर कलश की स्थापना करें। कलश में जल भरें।इसमें गंगाजल भी मिलाएं।कलश पर कलावा बांधें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रख दें। फिर जटा नारियल को कलावा को बांध दें।लाल कपड़े में नारियल को लपेट कर कलश के ऊपर रखें।