राजस्थान में चुनाव संपन्न, जैन न्यूज़

जयपुर-2023 राजस्थान में विधानसभा की 199 सीटों के लिए आज यानी 25 नवंबर को मतदान हुआ। इसमें पहली बार वोट डालने वाले युवाओं से लेकर 113 साल के बुजुर्ग तक ने लोकतंत्र के पर्व में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।छिटपुट घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो बाकी राज्यभर में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ।विधानसभा चुनाव में 200 में से 199 सीटों पर शनिवार को लगभग 70 प्रतिशत मतदान हुआ हैं। करणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह कुन्नर की मौत के कारण चुनाव टाला गया हैं।राजस्थान में किसकी सरकार बनेगी, इसका फैसला 3 दिसंबर को होगा, लेकिन राजस्थान के वोटर्स ने अपना फैसला ईवीएम में कैद कर दिया हैं।प्रदेश में शनिवार को वोटिंग हुई। जहां करीब 5 करोड़ 25 लाख मतदाताओं ने प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला किया। वोटिंग में जबदस्त उत्साह देखने को मिला। हर कैंडिडेट अपनी जीत के दावे कर रहा हैं। ऐसे में राजस्थान में ऊंट किस ओर बैठता है वो देखना दिलचस्प हैं। राजस्थान में 70 फीसदी वोटिंग हुई हैं।क्या राजस्थान में सत्ता परिवर्तन होगा या फिर सालों पुरानी परंपरा टूटेगी. जनता ने अपना फैसला वोट के जरिए दे दिया।मतदान के दौरान कई क्षेत्रों में हिंसा फायरिंग तोड़फोड़ और बूथ कैप्चरिंग के प्रयास की घटनाएं भी हुई हैं। मतदान के दौरान तीन जगहपर सुरक्षाबल को उपद्रवियों को काबू करने के लिए सख्ती बरतनी पड़ी।इस चुनाव में कई ऐसे दृश्य देखने को मिले जिसने आम लोगों को मतदान की जिम्मेदारी का एहसास दिलाया।राजस्थान चुनाव में सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट सुबह ही अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने पहुंचे और लोगों से भी ज्यादा से ज्यादा वोट करने की अपील की।प्रदेश में हर पांच साल में सरकार बदलने का पुराना रिवाज हैं।1993 में स्व.भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में आई। फिर 1998 में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। 2003 में कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई उस समय कांग्रेस को मात्र 21 सीट मिली। वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। 2008 में फिर चुनाव हुए तो गहलोत दूसरी बार सीएम बने। 2013 में वसुंधरा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और फिर 2018 में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनी और गहलोत तीसरी बार सीएम बने। पिछले तीस साल में बारी-बारी से गहलोत और वसुंधरा ही सीएम बनते रहे हैं। मतदाताओं ने इसका फैसला कर दिया हैं। अब तीन दिसंबर को 1862 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा।———————————जैन न्यूज़ -भगवान महावीर के 2550 निर्वाण वर्ष के उपलक्ष में चौपाटी- मुंबई पर महा आरती- परम पूज्य आचार्य सागरचंद्र सागर सुरीश्वारजी महाराज के मार्गदर्शन और मुंबई में विराजमान सभी संप्रदाय के सभी पूज्यों के पावन उपस्थिति में भगवान महावीर‌ के 2550 निर्वाण वर्ष उत्सव समिति द्वारा महाआरती का आयोजन हुआ था। इस पावन अवसर पर सभी को आने के लिए आमंत्रण दिया गया था।महाआरती के लाभार्थी हाड़ेचा नगर निवासी श्रीमान श्रेष्ठि वर्य श्री बाबूलालजी मिश्रीमलजी भंसाली परिवार मुंबई थे। श्री मंगल प्रभात जी लोढा कैबिनेट मंत्री महाराष्ट्र के सभी को आमंत्रित कर रहे थे और कार्यक्रम की रूपरेखा बना रहे थे। बहुत ही शानदार ढंग से महा आरती की गई लेकिन इसका विरोध भी हुआ।भगवान महावीर स्वामी के २५५०वें निर्वाण की स्मृति में मुंबई में सागर तट यानी कि गिरगांव चौपाटी की बालू पर खुले आसमान के नीचे कार्तिक वदि अमावस्या१३ नवंबर २३ सोमवार की शाम को महा-आरती का आयोजन हुआ था।कहा जाता हैं कि यह तथाकथित आयोजन जैन आचार्यों महात्माओं साधु- साध्वियों और ५ हजार से भी अधिक श्रावक-श्राविकाओं की शारीरिक और मानसिक उप स्थिति में होने से यह अत्यंत सफल रहा।लेकिन इस आयोजन ने कुछ अजीबोगरीब प्रश्न भी पैदा कर दिये हैं।परमात्मा के उद्बोधनों और ‌मूलभूत सिद्धांतों में संशोधन किए बिना।द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव अनुसार विधि- विधानों में परि वर्तन अनेकों बार हुए हैं। इस बार ऐसी कौन-सी आपातकालीन परिस्थितियां पैदा हो गई।कि इतना बड़ा अद्भुतऔर क्रांतिकारी कदम उठाने की आवश्यकताऔर अनिवार्यता महसूस की गई।हालांकि इस पंचम काल में सर्वज्ञ तो नहीं रहें लेकिन शास्त्रों के मर्मज्ञ कुछ महात्मा आज भी विद्यमान हैं।महाआरती के इस आयोजन को लेकर हजारों श्रद्धालुअसमंजस की स्थिति में हैं। कुछ नये प्रश्न पैदा हो रहे हैं।उनका स्पष्टीकरण गीतार्थ ज्ञानियों द्वारा हो ऐसी जिज्ञासा उनको हो जाना स्वाभाविक हैं।प्रश्न 1️⃣_गंदगी भरे उस क्षेत्र में प्रभु की प्रतिमा ले जाना क्या उचित था ?प्रश्न2️⃣_गोल्डन कलर की खड़ी प्रतिमा पूजनीय थी या केवल दर्शनीय थी ? प्रश्न3️⃣भविष्य में यदि दर्शनीय प्रतिमाएं भी इस तरह सड़कों पर या मैदानों में लाकर उनकी इस तरह आरतियां उतारी गई तो क्या अन्य विधि-विधानोंके भी होने की संभावना नहीं हैं।आराधना केनाम पर होने वाले ऐसे कृत्यों से आशा तनाएं क्या नहीं बढ़ेगी ? प्रश्न 4️⃣कुमारपाल महाराजा ने आरती उतारते वक्त हाथी, घोड़े या किसी वाहन का उपयोग नहीं कियाथा ?क्या यह सच नहीं है ?प्रश्न 5️⃣इस अद्भुत आयोजन में तथा कथित महा- सारथी ने हाथी के हौदे पर ही बिराजकर परमात्मा की उस प्रतिमा (जो पता नहीं पाषाण की थी,फाइबर की थी या और किसी धातु की थी) की आरती उतारी जो भूमि पर रखे किसी आसन पर ही बिराजित थी।क्या हमारा विनय विवेक सही था? प्रभु भक्ति का क्या यह स्व रूप सही था ? शास्त्रोक्त था?प्रश्न 6️⃣आरती उतारते वक्त क्या उन हजारों आगंतुकों ने अपने बूट- चप्पल उतारे हुए थे या पहने हुए हीआरती उतार रहे थे ?प्रश्न 7️⃣मंदिरों में तो लोग झूठे मूंह प्रवेश भी नहीं करते लेकिन उस आयोज न में जो लोग आरती गा रहे थे, क्या उन सबका मूंह साफ़ और स्वच्छ था ?प्रश्न 8️⃣_घूमने फिरने और चटपटे व्यंजनोंकेलुत्फ उठाने की उस चौपाटी पर क्या लोगों ने आरती के बाद उनका उपयोग नहीं किया होगा ?प्रश्न 9️⃣आरती के पहले और बाद में क्या आगंतु कों ने समुद्र के उस कच्चे पानी के साथ खिलवाड़ नहीं किया होगा? क्या तब जोश में होश रहा होगा?विशेष विश्लेषण ::—हमारा प्राचीन जैन धर्म सदैव दर्शनीय रहा हैं।उसे प्रदर्शनीय बनाने के नये नये नुस्खे और हथकंडे अपनाने की क्या जरूरत हैं?अंग-पूजा, अग्र-पूजाऔर भाव-पूजा तथाआत्म कल्याण लक्षी वैसी साधना,आराधना और उपासना के लिए हमारे जिनालय, उपाश्रय स्थानक इत्यादि पहले से ही मौजूद हैं। खुले मैदानों में यदि ऐसेआयोजन जायज हैं तो फिर करोड़ों की लागतसे मंदिर निर्माण कराना और मूर्तियां भराना क्याव्यर्थ नहीं हैं?क्या ऐसेआधुनिक आयोजन हमारी भावी पीढ़ी कोभ्रमित और गुमराह तो नहीं करेंगे? क्या ये ९ प्रश्न तर्कसंगत नहीं हैं।निजी तौर पर मुझे किसीसे राग-द्वेषयाईर्ष्या भी नहीं हैं। मेरे क़लम से उभरे ये प्रश्न उन हजारोंजैनियों के विचारों को। प्रतिबिंबित करते हैं जिन्हें ठीक से बोलना या लिखना नहीं आता।या फिर साहस नहीं हैं। लेकिन वे असमंजस की स्थिति में जरुर हैं।_मेरी आखिरी बात ::–_ पिछले कुछ वर्षों से हम यह देख रहे हैं कि पद,पैसे की प्यास और झुठी प्रतिष्ठा की भूख ने जैन धर्म और समाज का बहुत बड़ा नुक्सान किया हैं।क्या ऐसा नहीं लगता कि ५० वर्षों पहले जो जैन धर्म विद्वानों और सदाचारी पुण्यवानों के निर्देशनों के तहत था। वो अब अत्याधुनिक धन -कूबेरों और उनके स्वार्थी चापलू सों के संपूर्ण नियंत्रण में आ चुका हैं। ताज्जुब तो तब इस बात का होता हैं। कि जब सिद्धांतवादी और गीतार्थ कहे जाने वाले चारित्रनिष्ठ महात्मा भी खामोश रहने में हीअपनी भलाई समझते हैं।>मोहनलाल यु.जैन (लुणावा)–
—————————————महावीरस्वामी के निर्माण महोत्सव पर जैनियों का बना 10 विश्व रिकॉर्ड-मुंबई-हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार जैन समाज के चारों तबके श्वेतांबर, दिगंबर, स्थानकवासी और तेरापंथ मिलकर एक साथ 10 विश्व रिकॉर्ड मुंबई के गोरेगांव में बने। दिगंबर जैन समाज के आचार्य डॉक्टर प्रणाम सागर महाराज के नेतृत्व में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के 2550 में निर्वाण महोत्सव के मौके पर 25550 मीटर कपड़े पर हस्तलिखित भक्तामर स्त्रोत का विमोचन किया गया। जैन समाज के धार्मिक ग्रंथ भक्तामर का 18 भाषाओं में इस तरह हस्तलिखित महाधव्ज अभियान जैन समाज के आचार्य डॉक्टर प्रणाम सागर महाराज की परिकल्पना हैं। जैन समाज के आचार्य श्री नएपद सागरजी,महाराज कुंदन ऋषिजी महाराज, स्थानकवासी, तेरापंथी आचार्य श्री महाभ्रमण जी महा राज और नैना श्री जी महासती की विशेष उपस्थिति में मुंबई के नेचको ग्राउंड गोरेगांव में यह भव्य कार्यक्रम हुआ। जिसमें हर धर्म एवं समाज के साधु संत उपस्थित थे। आचार्य डॉक्टर प्रणाम सागर महाराज ने यह भी दावा किया कि हमें देश की आजादी महावीर स्वामी के सिद्धांतों की वजह से मिली हैं। महात्मा गांधी ने महावीर स्वामी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए इस्तेमाल किया और देश को आजादी मिली हैं। इस मौके पर भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी, शिवसेना विधायक प्रकाश सुर्वे प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। ऐसी जानकारी कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी भरत शाह ने दी। ——————–रानीवाड़ा में नव पद ओली  संपन्न- रानीवाड़ा राज. जिला सांचौर में परम पूज्य 451 दीक्षा दानेश्वरी आचार्य देव श्री गुणरत्न सुरीश्वरजी म.सा. के शिष्य परम पूज्य सूरी मंत्र आराधक आचार्य देव श्री रविरत्न सुरीश्वरजी म.सा. पंन्यास श्री वैराग्य रत्न वि. म.सा. मुनि श्री श्रुतरत्न वि. म.सा. एवं साध्वी श्री उज्जवला रेखा श्री जी 16 साधु साध्वी जी भगवंत की पावन कारी निश्रा में नव पद जी की शास्वती आसोज महीने की ओली के 145 लाभार्थी को आयंबिल तप के साथ प्रतिदिन उषा किरण में भक्तामर प्रवचन, श्रीपाल राजा की रास का वांचन हुआ। तीन दिन प्रभु भक्ति महोत्सव में पंचकल्याणक पूजा, शत्रुंजय महातिर्थ की भव्ययात्रा, नवाणु प्रकार की पूजा, चित्र भाव पूजन, संध्या भक्ति का आयोजन किया गया। ओली के लाभार्थी श्रीमान वक्ताजी ताराचंदजी वाणी गोत्र परिवार ने लाभ लिया था। सभी तपस्वीयों के तप का बहुमान किया गया। रानीवाड़ा में चल रहे उपधान तप का आरंभ दशहरा से हुआ एवं मोक्ष माला दिनांक 11- 12 -2023 को होगी। संगीतकार प्रदीप भाई जोशी, विद्धिकार कुलदीप सर मुंबई वालों ने प्रभु भक्ति प्रस्तुत की।