जैन न्यूज़,ठाणे मेट्रो,बागेश्वर धाम

जैन न्यूज़-42 साल बाद खुला अंतरिकक्ष पार्श्वनाथ जैन मंदिर, 98 वर्षीय सकरचंद शाह ने चाबी स्वीकार की-वाशिम-22 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर को खोलने और लेप प्रक्रिया का आदेश दिया। इस आदेश के अनुसार 42 साल बाद शनिवार 11 मार्च को श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर की मुहरें हटाकर कपाट खोले गए। 98 वर्षीय सकरचंद शाह ने पुलिस अधीक्षक बच्चन सिंह से मंदिर की चाबी ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 42 साल से बंद शिरपुर जैन स्थित अंतरिक्ष पार्श्वनाथ के मंदिर की सील खोलने की अनुमति देते हुए मूर्ति पर लेप लगाने की अनुमति दे दी थी।उस ऐतिहासिक आदेश के अनुसार शनिवार को शिरपुर थाने में आयोजित छोटेखानी कार्यक्रम में बच्चनसिंह ने अनावेदक एवं तत्कालीन प्रबंध न्यासी सकरचंद प्रेमचंद शाह (अकोला) 98 व वर्तमान प्रबंध न्यासी दिलीप नवलचंद शाह को मंदिर की चाबी सौंपी।इस अवसर पर तहसीलदार रवि काले, करंजा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी जगदीश पाण्डेय एवं न्यासी मंडल उपस्थित थे।चाबियां लेने के बाद पुलिस प्रशासन व तमाम ट्रस्टी मंदिर पहुंचे और मुहरें हटाकर कपाट खुलवाए।मंदिर खुलने से मूर्ति पर लेप लगाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद समाज के सदस्य पुन:पूजा कर सकेंगे।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर के कपाट खुल गए। सबकी यही प्रार्थना थी कि भगवान का मंदिर पूजा और दर्शन के लिए खोला जाए। – पन्यास प्रवर श्री परमहंस विजयजी महाराज, शिरपुर जैन।42 साल बाद उन्हें मंदिर की चाबी मिली और 98 साल की उम्र में उन्होंने मंदिर खोला। मैं सौभाग्यशाली था कि अपने जीवन की संध्या में इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। -साकरचंद शाह, पूर्व प्रबंध न्यासी। लेकिन शनिवार 18 -3- 23 को दिगंबर- श्वेतांबर दोनों पक्षों में फिर विवाद उत्पन्न हो गया। शनिवार को यहां पर मांसाहार खाने वाले बाउंसर को लेकर दिगंबर जैन समाज ने विरोध दर्शाया। इसके बाद दोनों पंथ के लोगों में विवाद हो गया। इस दौरान मारपीट में दो महिलाओं समेत 4 लोग घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं। रविवार को बाउंसर को लेकर उपजे विवाद के चलते दोनों पंथ के लोग फिर से हाथापाई पर उतरे। जिसके चलते मंदिर परिसर में सुरक्षा को लेकर भारी पुलिस बल बुलाया गया। श्वेताबंर पंथ के पारस गोलेच्छा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 फरवरी को शिरपुर जैन स्थित भगवान पार्श्वनाथ मंदिर खोलने और मूर्ति लेप प्रक्रिया को शुरू करने का अंतरिम आदेश जारी किया था। 10 मार्च को प्रशासन ने श्वेताम्बर पंथ को मंदिर की चाबी सौंपी। उन्होंने बताया, शनिवार को श्वेतांबर पंथ के सुरक्षा गार्ड अपनी ड्यूटी कर रहे थे और भक्त मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे।तब दिगंबर पंथ के 100 से 200 लोगों ने भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करते हुए बहस की। उन्होंने लोहे की छड़ों से पीटा, जिसमें सूरत के 4 भक्त घायल हो गए। एक श्रद्धालु को गंभीर चोटें आई है जो अस्पताल में भर्ती हैं।वहीं, कल हुए विवाद पर दिगंबर पंथ का पक्ष भी सामने आया हैं। दिगबंर पंथ के संजू छाबड़ा ने बताया कि श्वेतांबर पंथ के लोगों ने यहां पर मांसाहार करने वाले बाउंसर को रखा हैं जिसके चलते यह विवाद हुआ। रविवार को भारी पुलिस के तैनाती के बाद सोमवार को दोनों पक्षों में समझौता हो गया और अब वहां पर शांति हैं और दोनों पक्षों श्वेतांबर और दिगंबर जैन के लोग दर्शन कर रहे हैं।—————-ठाणे में गुरु भगवंतो की पावन निश्रा में वर्षीतप के चढ़ावों की जाजम बिछाई गई-ठाणे -पूज्य आचार्य श्री विजय प्रेम भुवन भानु सूरी महाराजा के समुदाय के पुण्य प्रभावी हेमतेज तेजस्व प्रवचनकार प.पू. आचार्य श्री विजयअक्षय बोधि सुरीश्वरजी म.सा.एंव प.पू. आचार्य देव श्रीमद् विजय मुक्ति वल्लभ सुरीश्वरजी म.सा. आदि विशाल संख्या में गुरु भगवंतो का ठाणे में शनिवार दिनांक 11-3-2023 को सुबह 8:30 बजे धूमधाम से प्रवेश हुआ। तत्पश्चात गुरु भगवनंतो का प्रवचन हुआ। प्रवचन दरमियान रविवार दिनांक 12 -3- 23 को सुबह 9:00 बजे बिछाई जाने वाली चढ़ावों की जाजम का आदेश दिया गया। ज्ञात हो कि जैन मंदिर टैंभी नाका ठाणे में प्रवचन कार पूज्य आचार्य श्री विजय प्रेम भुवन भानु सूरी महाराजा के समुदाय के पुण्य प्रभावी हेमतेज तेजस्व प्रवचनकार प.पू. आचार्य श्री विजयअक्षय बोधि सुरीश्वर जी महाराज एवं तपस्वी रत्ना पूज्य साध्वी रत्ना कीर्ति श्री जी महाराज साहेब की पावन निश्रा में करीब 570 वर्षीतप के तपस्वीयों ने 25 मार्च 2022 भगवान आदिनाथ का जन्म एवं दीक्षा कल्याणक -चैत्र कृष्णा अष्टमी को वर्षीतप की तपस्या शुरू की थी। वर्षी तप की तपस्या बहुत ही कठिन होती हैं। वर्षी तप के तपस्वीयों के वैशाख शुद्ध तीज़ रविवार 23-4- 2023 को पारणे होंगे ।दिनांक 12-3- 2023 को सुबह 9:00 जाजम बिछाने का मंगल विधान एवं पारणोत्सव संबंधी चढ़ावे प्रारंभ हुए। संगीतकार मेहुल रुपड़ा जालना से आए थे। चढ़ावों के अवसर पर विराजमान सभी महानुभावों की साधार्मिक भक्ति सुबह 12 से 2 तक रखी गई थी। चैत्र वद आठम बुधवार दि.15-3-23 को भगवान आदिनाथ के जन्म एवंम दीक्षा कल्याण के पावन दिन पर भव्य शुक्रस्तव महाअभिषेक किया गया।प.पू.आ.श्री अक्षयबोधी सुरी म.सा., श्रमणीवृदं,प. पू.सा.श्री रत्नशीला श्री जी म.सा.आदि ठाणा 4 की पावन निश्रा रही। संगीतकार गौतम भाई बारिया व विधिकार राहुल भाई टिम विरार थे। आयोजक -AYF श्राविका मंडल ठाणे थे।सामुहिक वर्षीतप आराधना के पारणोत्सव के चढ़ावों की जाजम का दुसरा दौर शनिवार दि 18-3-23 को प.पू. आचार्य देव श्रीमद् विजय अक्षय बोधि सूरीश्वरजी म. सा. की पावन निश्रा में हुआ। गुरु भगवंतो का रोज प्रवचन हो रहा हैं जिन्हें सुनने सैकड़ों लोग मणिभद्र हॉल में आ रहे हैं। सामूहिक वर्षीतप आराधना पारणोत्सव के चढ़ावों की जाजम का तीसरा दौर रविवार दिनांक 19-3-23 को सुबह 9 बजे से हुआ । चढ़ावों के जाजम के लाभार्थी परिवार सौ. चंदाबेन अशोकजी पारेख खुडाला/ ठाणे थे। संगीतकार राजेश जैन, करण जैन ने इस अवसर पर भक्ति की धूम मचाई। चैत्र सुद एकम बुधवार दिनांक 22-3-23 समय सुबह 6:30 बजे पूज्य आचार्य श्री विजय अक्षय बोधि सुरिश्वरजी म. सा. ने सकल संघ व वर्षीतप के तपस्वीयों को भगवानआदिनाथ जिनालय में बेसता महीने का महामांगलिक सुनाया। सभी कार्यक्रमों के आयोजक- श्री राजस्थान श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ ठाणा,श्री ऋषभदेव जी महाराज जैन धर्म टेंपल व ज्ञाती ट्रस्ट ठाणा के द्वारा भाव भरा आमंत्रण दिया गया था।—————————-अब महाराष्ट्र के ठाणे में मेट्रो दौड़ाने की तैयारी- मुंबई- ये साल मुंबई की चाल बदलने वाला साल हैं। जिस तरह से मेट्रो लाइनें शुरू हो रही हैं या काम चल रहा है, उससे शहर के ट्रैफिक की स्थिति बदलेगी। कुछ दिनों पहले ही मेट्रो-7 और मेट्रो-2ए का पूरा रूट शुरू हुआ, उसी दौरान मेट्रो-5 का एक महत्वपूर्ण काम भी पूरा हुआ हैं। शहर की ऐसी पहली मेट्रो जो किसी खाड़ी के ऊपर से गुजरेगी उसके ब्रिज का काम पूरा हो चुका हैं। मेट्रो-5 के लिए कशैली क्रीक पर ब्रिज का काम 23 जनवरी को पूरा हुआ हैं। मेट्रो-5 लाइन के लिए ये सबसे महत्वपूर्ण काम था, जिसमें 550 मीटर लंबा ब्रिज बनाना था। ये मेट्रो-5 के पहले चरण का हिस्सा होगा। इस रूट से ठाणे और कल्याण मेट्रो से कनेक्ट होंगे। कशैली क्रीक ब्रिज के लिए 13 स्पैन लॉन्च करने थे, इनमें से 9 स्पैन खाड़ी के ऊपर से गुजरते हैं। प्रत्येक स्पैन की लंबाई 42.23मीटर है और एक स्पैन में कुल 15 हिस्से हैं। कशैली खाड़ी पर गर्डर लॉन्च करने का काम 123 दिनों में पूरा कर लिया गया। मुंबई में सेंट्रल सबर्ब के लिए मेट्रो-5 लाइन जरूरी प्रॉजेक्ट हैं।मेट्रो-5 लाइन का पूरा रूट 2025 में तैयार होने की उम्मीद है, जबकि इसका पहला चरण दिसंबर, 2024 तक शुरू किया जाएगा। मेट्रो-5 से वडाला- कासरवडवली के बीच चलने वाली मेट्रो-4 और कल्याण से तलोजा के बीच प्रस्तावित मेट्रो-12 लाइन जोड़ी जाएगी। इस लाइन से मध्य रेलवे का बोझ कम होने के साथ ही ठाणे, भिवंडी और काल्याण जैसे इलाकों को फायदा होगा। इस लाइन के बाद यात्रा के समय में 50% से 75% तक कटौती होने की उम्मीद हैं।मेट्रो-5 का काम एफकॉन नाम की कंपनी कर रही हैं, जो कशैली खाडी पर ब्रिज तैयार करने के अलावा 11 किमी. का वायाडक्ट तैयार कर रही हैं। इसमें लाइन-4 को लाइन-5 से जोड़ा जाएगा इसके अलावा बालकुम, कशैली, काल्हेर, पूर्णा, अंजुरफाटा और धामनकर नाका नाम के 6 मेट्रो स्टेशन भी तैयार किए जा रहे हैं। एफकॉन के अनुसार कुल 11.68 किमी में से 9.3 किमी तक वायाडक्ट तैयार किया जा चुका हैं। 6 स्टेशनों का 60 प्रतिशत तक काम किया जा चुका है और इस मेट्रो के एक पैकेज (CA-28) का कुल 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका हैं।एफकॉन के प्रॉजेक्ट मैनेजर सुकेश सिंह के अनुसार, ‘कशैली खाड़ी ब्रिज बनाने के दौरान कई चुनौतियां सामने थीं। ड्रिल के लिए जिन मशीनों का उपयोग किया जा रहा था वे कई बार अटक जाती थीं। इन्हें निकालकर साफ करने के बाद दोबारा ड्रिलिंग प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती थी। ब्रिज पर काम करने के लिए ज्यादातर पानी में उतरना पड़ता था इसके लिए बार्ज और टगबोट का इस्तेमाल होता था। इस दौरान खाड़ी में लहरों के उतार-चढ़ाव से भी मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। हाई टाइड में चुनौतियां आती थीं। ब्रिज के लिए बीम बनाने और कास्टिंग का काम करने में चुनौतियां आ रही थीं। रोजाना सही ढंग से काम करने के लिए केवल 4 घंटे का विंडो ही मिलता था। इन चुनौतियों के बावजूद 4 महीनों के समय में कुल 22 टाई बीम तैयार किए गए।——————————————————बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पूरा ‘पर्चा’- मुंबई -मुंबई के मीरा भायंदर में बागेश्वर धाम का कार्यक्रम हुआ बागेश्वर धाम सरकार, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का मुंबई के मीरा रोड इलाके में एक दिव्य दरबार सजाया गया। दो दिवसीय इस दरबार में लाखों की संख्या में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुयायी उन्हें सुनने पहुंचे थे। लोग दीवारों और बिल्डिंग की छतों पर खड़े होकर उनका प्रवचन सुन रहे थे। शनिवार शाम 5:30 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ और रात 9:00 बजे कार्यक्रम खत्म हुआ।एक तरफ जहां लोग कार्यक्रम स्थल से अपने घर की तरफ निकल रहे थे, वही दूसरी तरफ लगभग 50 से 60 लोगों का एक समूह मीरा रोड पुलिस स्टेशन पहुंचा।जो लोग पुलिस स्टेशन पहुंचे, उनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। इन महिलाओं का आरोप था कि, कार्यक्रम के दौरान इनके गले से मंगलसूत्र के अलावा गले से सोने की चेन भी चोरी की गई। स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक 36 महिलाओं ने मंगलसूत्र और गले की चेन चोरी होने की शिकायत पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई हैं।4,87000 के गहने चोरी हुए हैं। पुलिस थाने पहुंची महिलाएं काफी परेशान नजर आईं। कांग्रेस के विरोध के कारण पूरी सुरक्षा में हजारों लोगों की भीड़ में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपना प्रवचन दिया। अपक्ष विधायक गीता जैन ने इस कार्यक्रम को आयोजित किया था। धीरेंद्र शास्त्री की वेबसाइट के मुताबिक़, ”धीरेंद्र शास्त्री का बचपन तंगहाली में बीता। कर्मकांडी परिवार था।पूजा पाठ में जो दक्षिणा मिल जाती, उसी से पाँच लोगों का परिवार चलता।धीरेंद्र के कुल तीन भाई-बहन हैं। धीरेंद्र सबसे बड़े हैं। बहन रीता गर्ग और शालीग्राम गर्ग धीरेंद्र के बहन और भाई हैं।बहन की शादी हो चुकी है और भाई आश्रम का काम देखते हैं।गढ़ा में धीरेंद्र की उम्र के कुछ युवाओं ने बीबीसी को बताया, ‘ज़्यादातर तो वो पंडिताई ही किया करते थे। पर हाँ, कभी कभार बैट-बॉल भी खेलते थे। आठवीं तक की पढ़ाई गढ़ा के सरकारी स्कूल में हुई।धीरेंद्र के दादा सैतू लाल गर्ग भी पूजा-पाठ और धार्मिक काम करते थे। दादा से पंडिताई के गुण धीरेंद्र ने सीखे और कम उम्र से ही पंडिताई करने लगे।एक वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री बताते हैं, ”हमें लगातार तीन बार सपने में हमारे दादा जी महाराज आए।हमसे अज्ञातवास पर जाने के लिए कहा।तब हम जानते नहीं थे कि अज्ञातवास क्या होता हैं। फिर हमें पता चला कि पांडवों ने भी किया था।तब हमें समझ आया कि अज्ञातवास से भी भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता हैं। हम जब अज्ञातवास से लौटेतो दरबार लगाने लगे।लोगों का साथ मिलता रहा।धीरेंद्र शास्त्री के साथ स्कूल में पढ़ चुके एक व्यक्ति बताता हैं कि मालूम नहीं कि दसवीं पास हुआ या नहीं। पहले तो वहीं घूमा करता था। पढ़ाई में भी कोई बहुत ख़ास नहीं था। कहता था कि बड़े होकर धंधा करना हैं।फिर पता नहीं कहाँ, एक साल के लिए ग़ायब हो गया था।लौटा तो अलग ही था।धीरे-धीरे विधायकों, बाहु बलियों का आना शुरू हुआ। आप ये समझो कि ये बना तो कांग्रेस नेताओं के कारण हैं पर आज जो हो रहा हैं, उसमें भाजपा का रोल हैं। वरना पाँच साल पहले तक साइकिल, मोटर- साइकिल से घूमा करता था।गुरुदेव का बचपन परिवार के ख़र्चे उठाने में बीता।फिर एक दिन दादा गुरु केआशीर्वाद से बालाजी महाराज की सेवा में जुट गए।इस सेवा का फल कितना मीठा है? धीरेंद्र शास्त्री की अब की ज़िंदगी जवाब देती हैं।धीरेंद्र शास्त्री अब प्लेन और कई बार प्राइवेट जेट से चलते हैं। भारत से लेकर लंदन तक उनका सम्मान होता हैं।जब धीरेंद्र शास्त्री कहीं निकलते हैं, तो दर्जनों गाड़ियों का काफ़िला साथ चलता हैं।लेकिन ये सब संभव कैसे हुआ?मंदिर गढ़ा में धीरेंद्र शास्त्री का जहाँ दरबार है, उसी के पास एक प्राचीन शिव मंदिर हैं।इसी मंदिर में एक संन्यासी बाबा होते थे, जिनकी विरासत और आशीर्वाद को आगे बढ़ाने की बातें धीरेंद्र करते दिखते हैं।इसी शिव मंदिर परिसर में बालाजी का भी एक मंदिर है, जिसे देखने पर ये पता चलता है कि नया निर्माण हैं।आरडी प्रजापति कहते हैं, ”इस जगह पर शंकर जी का मंदिर था। बगल में हनुमान जी की मूर्ति थी। धीरेंद्र के बाबा यहाँ पूजा किया करते थे।इन लोगों के पास घर द्वार कुछ नहीं था।पास में एक सामुदायिक भवन था, जिसमें ये लोग बरसाती डालकर रहते थे। पूजा पाठ करते थे। गाँव वाले मदद कर देते थे। धीरे-धीरे इन्होंने दरबार लगाना शुरू किया।कई मौक़ों पर धीरेंद्र शास्त्री ने रामभद्राचार्य जी महाराज को अपना गुरु बताया हैं। राम भद्राचार्य बचपन से ही नेत्रहीन हैं और उनके भक्तों में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे लोग भी शामिल हैं।जिस तरह भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा, उसका फ़ायदा धीरेंद्र को भी मिला।धीरेंद्र वीडियो यू-ट्यूब, वॉट्स ऐप और फिर संस्कार चैनल के ज़रिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचे।सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका अदा की।आज धीरेंद्र के ज़्यादातर वीडियो पर लाखों व्यूज़ हैं।यू-ट्यूब पर 37 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स और तीन साल में व्यू 54 करोड़ से ज़्यादा हैं।फ़ेसबुक पर बागेश्वर धाम के 30 लाख, ट्विटर पर 60 हज़ार और इंस्टाग्राम पर 2 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर हैं।विवादों में घिरे धीरेंद्र के समर्थन में रामदेव भी आए हैं। रामदेव ने कहा, ”हर जगह पाखंड नहीं खोजना चाहिए।खजुराहो की ओर दिल्ली से जाती ट्रेन अक्सर छतरपुर के पास रुकती हैं।ये कोई स्टेशन नहीं हैं। ये वो जगह है, जहाँ ख़ासकर मंगलवार, शनिवार को चेन खींचकर ट्रेन रोकी जाती हैं।ट्रेन से बड़ी संख्या में लोग उतरते हैं। इन लोगों के लिए बस या ऑटो, टैम्पो खड़े होते हैं बागेश्वर धाम जाने के लिए।